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दीपकम् कक्षा 8 अष्टमः पाठ: पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् हिन्दी अनुवाद शब्दार्था : अभ्यासकार्यः

  दीपकम्  कक्षा 8  अष्टमः पाठ:  पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् हिन्दी अनुवाद   शब्दार्था :  अभ्यासकार्यः   dipakam  kaksha 8  ashtamah pa...

 दीपकम् 

कक्षा 8 

अष्टमः पाठ: 

पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

हिन्दी अनुवाद  

शब्दार्था : 

अभ्यासकार्यः 

dipakam 

kaksha 8 

ashtamah path: 

pashyat konamaishanyam bharatasya manoharam

hindi anuvad  

shabdartha : 

abhyasakaryah 



  

   पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

                       

संकेत:- अरूणाचल प्रदेशः.......कथ्यन्ते।

शब्दार्थाः - विविधतायाः - अनेकता के कारण। समुदायानां - समुदायों के। प्रदेशानां प्रदेशों के। वैचित्र्यं-विचित्रता। पर्वतैः-पर्वतों से। एतेषु-इनमें। प्रवहन्ति-बहती हैं। पीठस्थलानि-पठार। उपत्यकाः- घाटियाँ। भू-वैविध्यं-भूमि की विविधता। सम्पदाभिः- सम्पत्तियों से। अष्टभातृभगिन्यः - आठ भाई-बहनें। नाम्ना-नाम से।

सरलार्थ :- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम नागालैण्ड, त्रिपुरा और सिक्किम ये सब आठ राज्य देश के पूर्वोत्तर भाग में स्थित हैं। ये राज्य केवल भारत के विविधता के कारण विशेष महत्त्व रखती हैं। इन प्रदेशों विशेष स्थान ही नहीं, अपितु सांस्कृतिक-ऐतिहासिक और पर्यावरणीय विचित्रता देश के अन्य भागों से पृथक् का प्राकृतिक सौन्दर्य, समुदायों की विविधता भौगोलिक हैं। पर्वतों और नदियों से सुशोभित ये राज्य पूर्व हिमालय की श्रेणियों में पत्काई और नागपर्वत प्रदेश में स्थित हैं। इनमें बराक-ब्रह्मपुत्र आदि नदियाँ बहती हैं और भी पर्वत श्रेणियाँ पीठस्थल (पठार) निम्नपर्वत और उपत्यका यानि (घाटियाँ) इस भू-भाग में भूमि की विविधता धारण करती हैं। प्राकृतिक-सम्पदाओं से समृद्ध यह प्रदेश पूर्व-दक्षिणपूर्व-एशिया का द्वार है। वे राज्य आठ भाई-बहनों के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे ही 'आठ बहनें' अथवा 'सात बहनें और एक भाई' कहे जाते हैं।

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संकेत:- अध्यापिका सुप्रभात....प्रथितः अस्ति।

शब्दार्थाः- शुभाशयाः- मगलमय। पठनीयम्-पढ़ना चाहिए। ज्ञातुमिच्छामः (ज्ञातुम् इच्छामः) जानना चाहते हैं। वदत-बोलो। अतिरिच्य-अतिरिक्त। शोभनं बहुत अच्छा। समवायः समुदाय/समूह। भ्राता-भाई। नाम्ना नाम से। प्रथितः - प्रसिद्ध ।

सरलार्थ :-

अध्यापिका -  सुप्रभात छात्रो। 

छात्र - सुप्रभात आचार्या।

अध्यापिका - मंगलमय हो। आज क्या पढ़ना चाहिए?

छात्र- हम सभी अपने देश के राज्यों के विषय में                

जानना चाहते हैं।

अध्यापिका - बहुत अच्छा। बताओ, हमारे देश में कितने    

राज्य हैं ?

स्वरा         - महोदया ! मेरी बहन कहती है कि हमारे देश में 

अठाईस राज्य हैं। इसके अतिरिक्त आठ केन्द्रशासित 

प्रदेश भी हैं।

अध्यापिका - बहुत अच्छा स्वरा! तुम्हारी बहन उचित                            

जानती है अच्छा क्या तुम सब जानते हो कि                    

इन राज्यों में आठ राज्यों का एक समूह है जो                    

'सात बहनें और एक भाई' नाम से प्रसिद्ध हैं।

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संकेत:- सर्वे छात्रा............ राज्यानि  इति।

शब्दार्थाः - परस्परं-आपस में। पश्यन्तः- देखते हुए। सप्तभगिन्यः - सात बहनें। प्रतीकात्मकः- सांकेतिक। साम्याद्-समानता से। वैशिष्ट्यात्-विशिष्टता से। उक्तोपाधिना-(उक्त + उपाधिना) दिए गए नाम से। प्रथितानि-प्रसिद्ध हैं। सुखकरी-सुख करने वाली। श्रावयतु-सुनाओ। यत्-जो।

सरलार्थ : - 

सभी छात्र   - (परस्पर आश्चर्य से देखते हुए) सात बहनें                         

और एक भाई!

श्रीश             - ये राज्य सात बहनें और एक भाई                किसलिए कहे जाते हैं?

अध्यापिका   - यह प्रयोग प्रतीकात्मक (सांकेतिक) है।    कभी सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेशों                      की समानता से और भौगोलिक विशिष्टता                        से  ये दिए गए नाम से प्रसिद्ध हैं।

सभी छात्र    - अहो ! अत्यन्त सुखकरी वार्ता है। तो                                

सुनाओ  कि वे कौन-से राज्य हैं ?

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संकेत:- अद्वयं...............मनोहरम् ।

शब्दार्थाः- अद्वयं-एकत्त्व। मत्रयं-मित्र। चैव-और भी। न-त्रि-युक्तं-तीन से युक्त नहीं। तथाद्वयम्-वैसे ही अद्वैत । सप्तराज्यसमूहोऽयं-यह सात राज्यों का समूह। मतम्-माना गया है। विश्रुतः-प्रसिद्ध । पश्य-देखो। कोणमैशान्यं-कोणम् + एशान्यं = पूर्वोत्तर दिशा के कोण में।

सरलार्थ-

यह सात राज्यों का समूह सात बहनों के रूप में माना जाता है जो एकत्व (एकता) (अद्वैत है) रूप से स्थित है। न ही तीनों से युक्त है न भिन्न-भिन्न।

उससे युक्त (जुड़ा हुआ) छोटा भाई सिक्किम प्रसिद्ध है। भारत के मनोहर पूर्वोत्तर कोने को देखो।

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संकेत:-  इत्थं भ्राता..........वर्तते ।

शब्दार्थाः - क्षेत्रपरिमाणैः - क्षेत्रफल के नाप से। बृहत्तराणि-विशाल। भ्रात्रा सह-भाई के साथ। प्राचीनेतिहासे- (प्राचीन + इतिहासे) प्राचीन इतिहास में। स्वायत्तीकृताः- अपने अधीन किए गए। महत्त्वाधायिनी-महत्त्व प्रदान करती है।

सरलार्थ - इस प्रकार सिक्किम भाई के साथ सात बहनों के ये राज्य हैं-अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैण्ड और त्रिपुरा। यद्यपि क्षेत्रफल के नाप से ये छोटे हैं तो भी गुण और गौरव की दृष्टि से विशाल प्रतीत होते हैं।

सब छात्र  -  कैसे महोदया !

अध्यापिका - भाई के साथ ये सात बहनें अपने प्राचीन इतिहास में प्रायः स्वाधीन ही देखी गईं। किसी          भी शासक के द्वारा इन्हें अपने अधीन नहीं                      किया गया। विविध संस्कृति की विशेषताओं में                   भारतभूमि पर इन भाई-बहनों की संस्कृति                         महत्त्व प्रदान करती है।

                                 च

संकेत:-  स्वरा............... ....... .निष्णाता : सन्ति। 

शब्दार्था : - एतासाम् - इनकी। नूनम् - निश्चय। प्रभृतिभिः- आदि से। सम्पद्भिः- सम्पदाओं से। तावदेतेषां - (तावत् + एतेषां) तो इनके। कथनीयम्-कहना चाहिए। सावहितमनसा - सावधान मन से। शृणुत-सुनो। बहुल-अधिकता। ऊर्जस्विनः - शक्तिशाली। समन्विताः- युक्त। परिपूरिताः - परिपूर्ण। निष्णाताः - निपुण । 

सरलार्थ -

स्वरा        -  इनकी अन्य कोई भी विशेषता है?

अध्यापिका – निश्चय ही है। पर्वत, वृक्ष, फूल आदि           प्राकृतिक सम्पदाओं से सुसमृद्ध ये राज्य हैं।                      भारतरूपी वृक्ष पर फूलों के गुच्छे के समान                        ये विराजमान हैं। तो इनके विषय में कुछ                            विशेषता भी कहनी चाहिए। सावधानी से                          सुनो। यह प्रदेश जनजाति बहुलता वाला है।                        गारो, खासी, नागा, मिजो, लेप्चा आदि बहुत                      सी जनजातियाँ यहाँ रहती हैं। शरीर से                              शक्तिशाली, इस प्रदेश वाले, अनेक भाषाओं                       से युक्त, पर्व (उत्सव) और परम्पराओं से                            परिपूर्ण, अपनी लीलाओं और कलाओं में                          निपुण हैं।

                                   

संकेत:- मालती - महोदये! .......अवाप्तोऽस्ति ।

शब्दार्थाः- वंशवृक्षाणां - बाँस के वृक्षों के। प्राप्यन्ते-प्राप्त हैं। प्रदेशेऽस्मिन्- (प्रदेशे अस्मिन्) इस प्रदेश में। बाहुल्यं-अधिकता। आवस्त्राभूषणेभ्य-वस्त्र और आभूषणों से लेकर। गृहनिर्माणपर्यन्तं-घर के निर्माण तक। वंशवृक्षनिर्मितानां-बाँस के वृक्ष से बनी हुई। यतो हि-क्योंकि। प्राचुर्यं-अधिकता। साम्प्रतं-अब। अवाप्तोऽस्ति - (अवाप्तः + अस्ति) प्राप्त है।

सरलार्थ : -

मालती          - महोदया ! वहाँ तो बाँस के वृक्षों के वन भी    पाए जाते हैं।

अध्यापिका -  हाँ। इस प्रदेश में हस्तशिल्पों की अधिकता है वस्त्रों और आभूषणों से लेकर गृहनिर्माण                          तक अक्सर बाँस के वृक्ष से निर्मित वस्तुओं                      का उपयोग किया जाता है। क्योंकि निश्चय                          ही  यहाँ बाँस के वृक्षों की प्रचुरता है। अब                          बाँस का यह उद्योग अन्तर्राष्ट्रिय ख्याति प्राप्त                     है।

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संकेत:- अभिनवः ..................... चलामः।

शब्दार्थाः - प्रदेशोऽयं - (प्रदेशः + अयं) यह प्रदेश। समीचीनः -ठीक/उचित। उच्चैः- जोर से। आगामिनि आगामी। तत्रैव- (तत्र + एव) वहाँ ही। सार्द्ध-साथ। मेऽयं (मे + अयं) मेरा यह। स्वर्गसदृशानि - स्वर्ग समान।

सरलार्थ-

अभिनव     -   भाई-बहनों का यह प्रदेश बहुत आकर्षक    प्रतीत होता है।

मृदुल         -  महोदया ! क्या घूमने के लिए भाई-बहनों का   यह प्रदेश उचित है?

सभी छात्र -  (जोर से) महोदया ! आगामी अवकाश में हम वहाँ ही जाना चाहते हैं।

स्वरा         -  आचार्या! आप भी निश्चय ही हमारे साथ         चलो।

अध्यापिका - मुझे यह विचार अच्छा लगता है। ये राज्य तो     घूमने के लिए स्वर्ग समान हैं। अतः अवश्य                         चलते हैं।

       अभ्यासात्   जायते  सिद्धि :

प्रश्न -1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन              उत्तरं लिखत -

(क) अस्माकं देशे कति राज्यानि सन्ति ?

(ख) प्राचीनेतिहासे काः स्वाधीनाः आसन्?

(ग) केषां समवायः 'सप्तभगिन्यः' इति कथ्यते?

(घ) अस्माकं देशे कति केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति?

(ङ) सप्तभगिनी-प्रदेशे कः उद्योगः सर्वप्रमुखः?

उत्तराणि : -

(क) अष्टाविंशतिः

(ख) इमाः सप्तभगिन्यः

(ग) अष्टराज्यानां

(घ) अष्ट :

(ङ) वंशोद्योगः

प्रश्न -2. अधोलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत-

(क) भ्रातृसहित-भगिनीसप्तके कानि राज्यानि सन्ति ?

(ख) इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः इति किमर्थ कथ्यन्ते ?

(ग) ऐशान्यकोणप्रदेशेषु के निवसन्ति?

(घ) पूर्वोत्तरप्रादेशिकाः केषु निष्णाताः सन्ति ?

(ङ) वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः कुत्र क्रियते ?

उत्तराणि :-

(क) भातृसहित-भगिनीसप्तके इमानि राज्यानि सन्ति-अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डः, त्रिपुरा, सिकिम्मः च।

(ख) इमानि राज्यानि सप्तभगिन्य कथ्यन्ते यतः एतेषाम् राज्यानां सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्यानां साम्याद् भौगोलिक वैशिष्ट्यात् च इमानि उक्त उपाधिना प्रथितानि।

(ग) ऐशान्यकोणप्रदेशेषु गारो-खासी-नागा-मिजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः निवसन्ति।

(घ) पूर्वोत्तरप्रदेशिकाः बहुभाषाभिः समन्विताः, पर्वपरम्पराभिः परिपूरिता, स्वलीला-कलासु च निष्णाताः सन्ति ।

(ङ) वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः आवस्त्राभूषणेभ्यः गृहनिर्माण-पर्यन्तं क्रियते ।

प्रश्न-3 अधोलिखितेषु पदेषु प्रकृति-प्रत्ययविभागं कुरुत-

यथा-गन्तुम्             गम्       + तुमुन्

(क) ज्ञातुम्

(ख) विश्रुतः

(ग) अतिरिच्य

(घ) पठनीयम्

उत्तराणि -
(क) ज्ञा + तुमुन्

(ख) वि + श्रु + क्त

(ग) अति + ऋच् + ल्यप्

(घ) पठ् + अनीयर्

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प्रश्न - 4 रेखा‌ङ्कितम् पदम् आधृत्य                         प्रश्नानिर्माणं कुरुत :--

(क) वयं स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः।

(ख) सप्तभगिन्यः प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः।

(ग) प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते।

(घ) एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थ स्वर्गसदृशानि ।

उत्तराणि : -

(क) वयं कस्य राज्यानां विषये ज्ञातुम् इच्छामः?

(ख) काः प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः?

(ग) प्रदेशेऽस्मिन् केषाम् बाहुल्यं वर्तते?

(घ) एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं कीदृशानि ?

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प्रश्न 7. पट्टिकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-

सिक्किमः, पूर्वोत्तरराज्यानि, अष्टाविंशतिः, स्वदेशस्य राज्यानाम्, अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरं, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रिपुरा, जनजातिः, प्राचुर्यम्

(क) छात्रा: अद्य विषये ज्ञातुमिच्छन्ति ।

(ख) अस्माकं देशे राज्यानि तथा अष्ट केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति।

(ग) सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति कथ्यन्ते।

(घ) सप्तभगिन्यः इत्युक्तानि राज्यानि-

(ङ) प्रदेशेऽस्मिन् बाहुल्यम् अस्ति।

(छ) पूर्वोत्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां विद्यते।

उत्तराणि :-  

(क) स्वदेशस्य राज्यानाम्

(ख) अष्टाविंशतिः

(ग) पूर्वोत्तरराज्यानि

(घ) सिक्किमः, अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरं, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्ड, त्रिपुरा।

(ङ) जानजातिः

(छ) प्राचुर्य

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